उदारवाद (Liberalism) का अर्थ, परिभाषाएं, विशेषताएं , आलोचना , विकास

उदारवाद (Liberalism) का अर्थ, परिभाषाएं, विशेषताएं , आलोचना , विकास

उदारवाद (Liberalism) का अर्थ

उदारवाद या लिबरलिज्म एक विचारधारा है। जो स्वतंत्रता और समानता को प्रोत्साहित करके एक ऐसे समाज की रचना करना चाहता है जिसमें सभी लोग स्वतंत्र हो, बाजार मांग और पूर्ति के अनुसार कार्य करें और सरकार केवल लोगों के अधिकारों की रक्षा करें।

उदारवाद को अंग्रेजी मे 'लिबेरलिस्म' कहा जाता है। और इस 'लिबेरलिस्म' शब्द की उत्पति लैटिन भाषा के शब्द ‘लिबर’ से हुई है। जिसका अर्थ स्वतंत्रता है।

उदारवादियो के अनुसार मनुष्य एक विवेकशील प्राणी है जिसे अपने हित और अहित के बारे में पता होता है इसलिए हमें सभी मनुष्यों को स्वतंत्र छोड़ देना चाहिए

हॉब्स उदारवादी विचारधारा के प्रथम विचारक थे परंतु जॉन लॉक को उदारवादी विचारधारा का जनक माना जाता है।

हॉब्स के अनुसार जनता ने ही राज्य को चुना है अब राज्य जो चाहे वो करें परन्तु जनता राज्य का विरोध नहीं कर सकती है।

जॉन लॉक के अनुसार जनता राज्य को इसलिए चुनती है ताकि राज्य लोगों के प्राकृतिक अधिकारों (जीवन का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, संपत्ति का अधिकार) की रक्षा करेगा और यदि राज्य इन अधिकारों की रक्षा नहीं करता तो जनता को अधिकार है कि वह राज्य को हटा सके। अंतः इसलिए जॉन लोग को उदारवाद का जनक माना गया।

प्रमुख विचारक:- बैंन्थल, जॉन स्टूअर्ट मिल, हरबर्ट स्पेसर, जेफरसन, लिंन्डसे, बार्कर और मैकीवर

उदारवाद (Liberalism) की परिभाषा

सतोरी के अनुसार:- उदारवाद व्यक्तिगत स्वतंत्रता, न्यायिक रक्षा और संवैधानिक राज्य का सिद्धांत और व्यवहार है।

कोर्नर के अनुसार:- उदारवाद व्यक्तिगत स्वतंत्रता, व्यक्तिगत मानवाधिकारों और व्यक्तिगत मानव खुशी के आदर्शों के साथ शुरू और समाप्त होता है।

जे एस मिल के अनुसार:- उदारवाद व्यक्तिगत स्वतंत्रता, विचार की स्वतंत्रता और सरकारी हस्तक्षेप का न होना आदि बातो को बढ़ावा देता है। इसलिए व्यक्ति को स्वतंत्रता होना चाहिए परंतु वह दूसरों की स्वतंत्रता को हानि न पहुचाए।

आदम स्मिथ के अनुसार:- दारवाद नि:शुल्क व्यापार बढ़ावा को देता है, जहाँ आर्थिक स्वतंत्रता होती है और व्यापार में सरकारी हस्तक्षेप कम होता है।

जॉन रॉल्स के अनुसार:- उदारवाद न्याय के माध्यम से, समानता और मौलिक स्वतंत्रता की रक्षा करता है। यह उस समाज को बनाने का प्रयास करता है जहाँ सभी को समान अवसर मिलते है।

उदारवाद (Liberalism) का विकास

उदारवाद के विकास के निम्नलिखित कारण है:-

1. पूर्नजागरण काल:- मध्यकालीन युग में तानाशाह राज्य चर्च के अनुसार कार्य करता था और किसान, मजदूर जैसे आम लोगों के साथ बहुत बुरा व्यवहार किया जाता था।

समय बीतने के अनुसार लोगों में तर्क बुद्धि का विकास हुआ और लोग जागरुक होने लगे थे अतः धीरे-धीरे विज्ञान, समाज, राजनीति और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में बहुत बदलाव हुए थे।

2. गौरवपूर्ण क्रान्ति (1688-89):- 1688 में ब्रिटेन में तानाशाह राजा को हटाकर उनकी बेटी "मेरी" को सत्ता में लाया गया था जिन्होंने संसद के अनुसार कार्य किया था इस बड़े बदलाव को ही गौरवपूर्ण क्रान्ति कहा जाता है।

इसी क्रांति में तानाशाह को खत्म करने के लिए प्रथम कदम उठाया गया था और इस क्रांति में हिंसा का प्रयोग नहीं किया गया था इसलिए इसका नाम गौरवपूर्ण क्रांति पड़ा था।

3. आधुनिकीकरण और वैज्ञानिक सोच:- 17वीं और 18वीं सदी में वैज्ञानिक सोच और आधुनिकीकरण ने उदारवादी विचारधारा को प्रोत्साहित किया। विज्ञान, तकनीक, और व्यापार में वृद्धि ने समाज में नए विचारों को बढ़ावा दिया।

4. फ्रांसीसी क्रांति (1789):- 1789 में फ्रांस में क्रांति के बाद ही स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व आदि अधिकारो का विकास हुआ था।

5. अमेरिकी क्रन्तिकारी युद्ध (1775 - 1783):- 1975 76 में अमेरिका में स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ी गई थी और 4 जुलाई 1776 में अमेरिका स्वतंत्र हो गया था अंतः अमेरिका में पूंजीवादी अर्थव्यवस्था को अपनाया गया।

6. मानवाधिकार के सार्वभौमिक घोषणा:- 10 दिसंबर 1948 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने विश्व स्तर पर मानव अधिकार की घोषणा की थी जिसके तहत विश्व भर के नागरिकों के लिए मौलिक अधिकारों ( स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व) को लागू किया गया था।

7. समाजिक सुधार:- उदारवाद ने समाज में सुधार और प्रगति को प्रोत्साहित किया है, जो समानता, संघर्ष विराम, और न्याय की दिशा में है।

उदारवाद (Liberalism) की विशेषताएं

1. व्यक्ति का महत्व:- जॉन लॉक के अनुसार राजनीतिक व्यवस्था में व्यक्ति ही प्रमुख केंद्र है जिसके चारों और हर चीज घूमती है इसलिए यह सिद्धांत यह कहता है कि हर व्यक्ति को अपने विचारों, धर्म, और जीवन शैली की स्वतंत्रता होनी चाहिए।

2. राज्य कृत्रिम (artificial) संस्था:- उदारवादी राज्य तथा समाज को कृत्रिम संस्थाएँ मानते हैं क्योंकि समाज में एक व्यक्ति का दूसरे व्यक्ति से जो संघर्ष होता है उसे रोकने के लिए ही राज्य की सृष्टि हुई है और इन्ही मौलिक जरूरतो ने राज्य नामक संस्था को जन्म दिया है।

जॉन लॉक ने तो यहाँ तक कह दिया है कि यदि राज्य मनुष्यों के कल्याण के लिए कार्य नहीं करता तो वे राज्य का विरोद्ध कर सकते हैं।

3.विचार की स्वतंत्रता:- उदारवाद स्वतंत्र विचारधारा को प्रोत्साहित करता है, जो नई विचारों, सोच, और प्रेरणा को स्वागत करती है।

यह विचारधारा विभिन्न विचारों और धार्मिक विचारधाराओं को सहित खुले मन, एकता, और विविधता को प्रोत्साहन करती है।

4. व्यक्ति साध्य और राज्य साधन:-
उदारवाद की एक मान्यता यह भी है कि व्यक्ति साध्य है तथा राज्य साधन है। क्योंकि व्यक्ति ने समाज, राज्य तथा अन्य संस्थाएँ निर्मित की हैं, ताकि ये संस्थाएँ उसके विकास में सहायता करे।

उदारवादियों के अनुसार समाज व राज्य कृत्रिम संस्थाएँ है। इन सब संस्थाओं का अस्तित्व ही व्यक्ति के लिए है। यदि राज्य व समाज व्यक्ति का विकास नहीं करते हैं तो इनके अस्तित्व का कोई महत्व नहीं है।

5. प्राकृतिक अधिकारों की मान्यता:- उदारवादी जॉन लॉक के अनुसार जीवन, सम्पत्ति तथा स्वतंत्रता व्यक्ति के प्राकृतिक अधिकार हैं। और राज्य का निर्माण इन अधिकारों की रक्षा के लिए हुआ है। और क्योंकि ये अधिकार व्यक्ति को राज्य या समाज द्वारा नहीं दिए गए है इसलिए राज्य को इन्हें कम करने का कोई अधिकार नहीं है।

6. राज्य का सीमित कार्य क्षेत्र:- उदारवादी विचारक व्यक्ति की स्वतंत्रता को महान मनते हैं। उनके अनुसार एक व्यक्ति अपने हित तथा अहित को अच्छी तरह समझता है। इसलिए व्यक्ति को अपना विकास करने के लिए उसकी इच्छानुसार अवसर मिलना चाहिए। और राज्य को व्यक्ति के कार्यों में कम से कम हस्तक्षेप करना चाहिए।

उदारवादी विचारको के अनुसार सर्वोतम सरकार वह है जो सबसे कम शासन करती है।

7. पूंजीवादी अर्थव्यवस्था:- उदारवादियों के अनुसार पूंजीवादी अर्थव्यवस्था ही सर्वोच्च अर्थव्यवस्था होती है क्योंकि उदारवादियों का मानना है कि अर्थव्यवस्था या बाजार मांग और उत्पादन पर निर्भर करने चाहिए ना कि किसी राज्य पर।

8.. लोकतंत्र:- उदारवादी तानाशाह शासन का विरोध करते हैं और लोकतंत्र शासन को सर्वोच्च मानते हैं क्योंकि लोकतंत्र का अर्थ होता है लोगों का, लोगों के लिए और लोगों द्वारा किया गया शासन।

9. कल्याणकारी राज्य:- उदारवादियों के अनुसार राज्य को केवल लोगों के कल्याण के लिए कार्य करना चाहिए ना कि उनकी स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करना चाहिए।

10. स्वतंत्र व्यापार:- उदारवाद स्वतंत्र व्यापार को बढ़ावा देता है जहां राज्य का काम से कम हस्तक्षेप होता है और इसमें व्यापार को स्वतंत्रता, प्रतिस्पर्धा, और नवाचार समर्थन किया जाता है।

उदारवाद के अनुसार वस्तुओं का मूल्य राज्य द्वारा निर्धारित नहीं किया जाना चाहिए बल्कि मांग और पूर्ति (demand and supply) पर निर्भर करना चाहिए

उदारवादी विचारधारा (Liberalism) की आलोचना या मूल्यांकन

मार्क्सवादियो ने उदारवाद की कुछ कमियां को उजागर किया है:-

1. शासन में उद्योगपति का बोलबाला:- मार्क्सवादीयों ने आलोचना करते हुए कहा है कि उदारवाद मे जनता के शासन जैसी कुछ चीज नहीं है क्योंकि सरकार में उद्योगपति का बोलबाला होता है जो लोकतंत्र शासन के विरुद्ध है।

2. विचार की स्वतंत्रता जैसी कोई चीज नहीं:- मार्क्सवादीयों ने आलोचना करते हुए कहा है कि उदारवाद मे प्रचार साधनों पर भी पूंजीपतियों का प्रभुत्व पाया जाता है इसलिए विचार की स्वतंत्रता जैसी कोई चीज नहीं है।

3. बंधुआ मजदूरी:- मार्क्सवादीयों ने आलोचना करते हुए कहा है कि उदारवाद ने समाज में स्वतंत्रता के खिलाफ काम किया है क्योंकि उद्योगपति श्रमिक से कम पैसों मे ज्यादा से ज्यादा काम लेने की कोशिश करता है और कई उद्योगो मे काम करने का अनुकूल वातावरण भी नहीं होता है।

4. रंगभेद की नीति:- मार्क्सवादीयों ने आलोचना करते हुए कहा है कि उदारवाद मे कई बार, रंग, जाति, धर्म आदि के आधार पर समाज में भेदभाव होता है जो उदारवाद के मूलभूत सिद्धांतों के खिलाफ है।

5. साम्राज्यवादी मूल्य:-
अक्सर उदारवादी व्यवस्था ने साम्राज्यवादी मूल्यों को प्रचारित (Promoted) किया जाता है जैसे अल्पविकसित देशों का शोषण और आर्थिक विभाजन को बढ़ावा देना। जिसके कारण एक विकसित देश अल्पविकसित एवं विकासशील देशों का शोषण करता है।

6. भुखमरी और गरीबी:- उदारवादी समाज में भूखमरी और गरीबी की समस्या बनी रहती है, जिसमें समाज के कुछ वर्ग अत्याधुनिकता के लक्ष्यों तक नहीं पहुंच पाते है।

7. गरीब व श्रमिक लोगों का शोषण:- उदारवादी विचारधारा ने समाज में गरीब और श्रमिक वर्गों के शोषण को देखा है, जहां उन्हें उनके अधिकारों से वंचित किया जाता है।

Related Questions

1.Throw light on the rise and development of liberalism.
उदारवाद के उदय और विकास पर प्रकाश डालिए ।

OR/अथवा

2.Write an essay explaining the basic principles of liberalism.
उदारवाद के मूल सिद्धांतों की व्याख्या करते हुए एक निबन्ध लिखिए।

OR/अथवा

3.Discuss the liberal democratic theory. Throw light on the relevance of the pluralistic principle of democracy.
उदारवाद लोकतांत्रिक सिद्धांत की विवेचना कीजिये। लोकतंत्र के बहुलवादी सिद्धांत की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालिये।

OR/अथवा

4.On what grounds would you call any approach to politics liberal? Explain with suitable examples.
राजनीति के किसी उपागम को किन आधारों पर आप उदारवादी कहेंगे? उपयुक्त उदाहरणों सहित व्याख्या कीजिये।

OR/अथवा

5.Discuss the liberal understanding of the nature and role of the modern nation-state.
आधुनिक राष्ट्र-राज्य की प्रकृति और भूमिका के बारे में उदारवादी समझ की विवेचना कीजिये।


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